Ranchi : झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री दोपहिया वाहन पेट्रोल क्रय अनुदान योजना को फरवरी 2026 से बंद करने का फैसला किया है। इसका खुलासा खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग से मांगी गई आरटीआई के जवाब में हुआ। आरटीआई कार्यकर्ता सुनील महतो को विभाग ने जानकारी दी कि योजना में लाभुकों की रुचि लगातार घट रही थी और इसे पूरी तरह प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा पा रहा था। इसी कारण सरकार ने योजना बंद करने का निर्णय लिया। राज्य सरकार ने इस योजना की शुरुआत 26 जनवरी 2022 को की थी। इसका उद्देश्य राशन कार्ड धारक दोपहिया वाहन मालिकों को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से राहत देना था। योजना के तहत लाभार्थियों को हर महीने अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल पर 25 रुपये प्रति लीटर की दर से 250 रुपये तक की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती थी। विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, योजना में लोगों की कम भागीदारी इसे बंद करने की बड़ी वजह बनी। आवेदन प्रक्रिया में कई तकनीकी शर्तें थीं, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ नहीं उठा सके। योजना का लाभ लेने के लिए राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन एक ही व्यक्ति के नाम पर होना अनिवार्य था। यही शर्त कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी और वे योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए।
मंजूर था 10 करोड़ का बजट
वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए कुल 10 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया था। इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 5 करोड़, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 4 करोड़ और अनुसूचित जाति के लिए 1 करोड़ रुपये तय किए गए थे। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि योजना अब पूरी तरह प्रभावी नहीं रह गई है, इसलिए इसे फरवरी 2026 से बंद किया जा रहा है। विभाग की ओर से पिछले और चालू वित्तीय वर्ष में मिले आवेदनों के आधार पर ही लाभ देने की अनुमति दी गई थी।
प्रचार पर करोड़ों खर्च, फिर भी बंद हुई योजना
दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार ने योजना के प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण और सेमिनार जैसे कार्यों पर भी बड़ी राशि खर्च की। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रचार-प्रसार मद में 12 करोड़ रुपये का संशोधित बजट रखा गया था। इसमें से 10.25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जबकि करीब 4.90 करोड़ रुपये खर्च भी किए गए। अब सवाल उठ रहा है कि जिस योजना के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उसी योजना को लाभुकों की कम रुचि के कारण बंद करना पड़ रहा है। विभाग ने सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों और डीसी को निर्देश दिया है कि योजना के तहत बाहरी स्रोत से नियुक्त तकनीकी कर्मियों को नोटिस देकर काम से हटाया जाए।
