बिहार SIR :  चुनाव आयोग जनता की अदालत में, हर नागरिक से पूछे पांच सवाल

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 बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को लेकर बवाल मचा हुआ है. विपक्षी दल चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर हमलावर हैं. राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगाते हुए बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं. आज उनकी यात्रा सुपौल पहुंची है. चुनाव आयोग विपक्षी दलों के निशाने पर है.

चुनाव आयोग के सामने अपनी साख बचाने का सवाल पैदा हो गया है. इससे पूर्व चुनाव आयोग प्रेस कॉंफ्रेंस कर  SIR को लेकर अपना रुख साफ कर चुका है. इस क्रम में आज मंगलवार को चुनाव आयोग ने जनता की अदालत का दरवाजा खटखटाया है. आयोग ने देश के हर नागरिक से पांच सवाल पूछते हुए विशेष पुनरीक्षण कार्य में सहयोग की अपेक्षा की है.

आयोग के सवालों का मकसद वोटर लिस्ट को शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो सकें.  आयोग का कहना है कि अगर लोग आयोग के सवालों से सहमत हैं तो इस विशेष पुनरीक्षण (SIR)  कार्य में सहयोग करें. 


आयोग ने पूछा है कि क्या मतदाता सूची की गहन जांच होनी चाहिए या नहीं?, क्या दिवंगत लोगों के नाम हटाये जाने चाहिए या नहीं?,  अगर किसी का नाम मतदाता सूची में दो या अधिक स्थानों पर है, तो क्या उसे केवल एक ही स्थान पर रखा जाना चाहिए या नहीं?. यह भी पूछा है कि क्या उन लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए जो दूसरी जगह चले गये हैं? अंतिम पांचवां सवाल पूछा है कि क्या विदेशियों के नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?


आयोग ने जनता से कहा है कि यदि आपका उत्तर हां में है, तो आप मतदाता सूची को शुद्ध करने के  लिए चुनाव आयोग के कार्य में योगदान दें.  आयोग ने जानकारी दी है कि  पिछले छह माह में उप-मंडल, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ व्यवस्थित बैठक की है.

बताया कि मार्च माह में  देश में सभी राज्यों में उप-मंडल पर मतदाता-पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) सहित राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारियों ने राजनीतिक दलों के साथ 4719 बैठकें   की.  इन बैठकों राजनीतिक दलों के लगभग 28,000 प्रतिनिधि शामिल हुए. कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारियों , 800 जिला निर्वाचन अधिकारियों और 3879 मतदाता पंजीयन ने 40 बैठकें बुलाई थी.  
 


आयोग ने जानकारी दी कि 25 अगस्त की सुबह तक राजनीतिक दलों ने प्रारूप नामावली से जुड़े महज 10 दावे और आपत्तियां ही आयोग को दी है,  सभी 10 दावे और आपत्ति क्षेत्रीय पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) के बीएलओ ने जमा किये हैं.  

सूत्रों ने आयोग के हवाले से कहा है कि आपत्तियों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है. अहम बात यह है कि आयोग ने यह सभी जानकारियों सुप्रीम कोर्ट को दी है.  आयोग ने कहा है कि बिहार में SIR के तहत आवेदन देने के लिए सिर्फ पांच दिन बचे हैं.   

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