मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में तकमील-ए-हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की ऐतिहासिक और रूहानी तकरीब l

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रांची/कांके प्रखंड के कोकदोरो इस्लामपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे से 1 बजे तक तकमील-ए-हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन का भव्य, गरिमामय और आध्यात्मिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस मुक़द्दस अवसर पर पूरे क्षेत्र में खुशी और इमान-अफ़रोज़ी का माहौल देखने को मिला।
इस यादगार कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड की प्रतिष्ठित धार्मिक और शैक्षणिक शख्सियत मौलाना डॉ. असगर मिस्बाही साहब ने की।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुरआन केवल पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि इंसानी ज़िंदगी को सही रास्ता दिखाने वाली मुकम्मल रहनुमाई है।

कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर क़ारी शोहेब अहमद नोमानी की दिलों को सुकून देने वाली तिलावत से हुई, जिसने पूरे वातावरण को नूरानी बना दिया। इस अवसर पर जमीयत उलेमा हिंद, कांके ब्लॉक के अध्यक्ष हज़रत मुफ्ती अब्दुल मोईज़ साहब, मदरसा के नाज़िम अलहाज कतीबुल हक साहब, मदरसा के तमाम शिक्षकगण एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

समारोह का मुख्य आकर्षण 9 हाफ़िज़-ए-क़ुरआन की दस्तारबंदी रहा।
सभी हाफ़िज़ों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की गई।
इस दौरान हाफ़िज़ अबू सुफ़ियान ग़ाज़ी द्वारा प्रस्तुत नात-ए-पाक ने मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया और पूरा मजलिस अल्लाह की हम्दो-सना से गूंज उठा।
कार्यक्रम का सुंदर और अनुशासित संचालन मौलाना तौफीक साहब ने किया।
बाहर से पधारे गणमान्य उलेमा और समाजसेवियों की गरिमामय उपस्थिति में सामूहिक दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर मुफ्ती अफ़रोज़ कासमी, क़ारी मुजफ्फर हुसैन, मुफ्ती शाहिद मजाहिरी, मुफ्ती उमर फारूक, मौलाना शहामत हुसैन कासमी, हाफ़िज़ आबिद हुसैन, मौलाना मुजम्मिल, मौलाना काशिफ साहब, मौलाना गुलफाम, मौलाना सद्दाक हुसैन, क़ारी मासूम, हाफ़िज़ तज्जमुल, हाफ़िज़ अरशद, हाफ़िज़ वसीम, सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद थे।

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