
Hazaribagh : झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल मुख्यालय हजारीबाग में आयुक्त (कमिश्नर) का पद पिछले डेढ़ महीने से खाली पड़ा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को तत्कालीन आयुक्त पवन कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक नए आयुक्त की पदस्थापना नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर प्रमंडल स्तर के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है और व्यवस्था ठप होने जैसी स्थिति बनती जा रही है।
सात जिलों का प्रशासनिक संतुलन प्रभावित
उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ जिले आते हैं। इन जिलों में विकास योजनाओं की निगरानी, विभागीय समीक्षा और प्रशासनिक समन्वय की अहम जिम्मेदारी आयुक्त कार्यालय की होती है। पद रिक्त रहने से सातों जिलों में प्रशासनिक संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।
विकास योजनाओं की समीक्षा पर पड़ा असर
आयुक्त स्तर पर होने वाली विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा पिछले डेढ़ महीने से नहीं हो पाई है। विभिन्न विभागों की योजनाओं, खर्च और प्रगति रिपोर्ट पर निगरानी का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। इसका असर कई योजनाओं की समयबद्ध पूर्णता पर पड़ सकता है।
विधि-व्यवस्था को लेकर नहीं हुई प्रमंडलीय बैठक
आयुक्त के नहीं रहने का असर कानून व्यवस्था पर भी पड़ा है। बीते डेढ़ महीने में उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ कोई भी प्रमंडलीय समीक्षा बैठक नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार अंतिम बैठक 26 दिसंबर 2025 से पहले हुई थी, जिसके बाद से विधि-व्यवस्था को लेकर कोई ठोस दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
आयुक्त न्यायालय में मामले लंबित
आयुक्त कार्यालय से जुड़े न्यायालयीन मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हुई है। भूमि विवाद, अपील और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़े दर्जनों केस आयुक्त न्यायालय में लंबित पड़े हैं। आवेदकों को समय पर न्याय नहीं मिल पाने से नाराजगी बढ़ रही है।
त्योहारों से पहले बढ़ी प्रशासन की चिंता
फरवरी और मार्च में कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं। आमतौर पर इन अवसरों से पहले आयुक्त स्तर पर प्रमंडलीय समीक्षा बैठक कर सुरक्षा और विधि-व्यवस्था की रणनीति तय की जाती है। लेकिन पद खाली रहने से ऐसी बैठकों को लेकर प्रशासनिक हलकों में असमंजस बना हुआ है।
आचार संहिता को बताया जा रहा कारण
सूत्रों के मुताबिक नगर निकाय चुनाव को लेकर लागू आचार संहिता को नए आयुक्त की नियुक्ति में देरी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए इतने लंबे समय तक पद खाली रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर यह मांग तेज होती जा रही है कि सरकार जल्द से जल्द नए आयुक्त की नियुक्ति करे, ताकि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का प्रशासनिक ढांचा फिर से पटरी पर लौट सके।
