04लेवर कोड गुलामी का दस्तावेज है,उसे रद्द करो-महेश /ऐक्टू
संविधान भारत की आत्मा है,इसकी रक्षा करना सभी भारतवासी का कर्तव्य है-माले
कर्मचारी महासंघ ने लेवर कोड का प्रति जलाया।

दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों एवं स्वतंत्र कर्मचारी संगठनों के निर्णयानुसार राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के अवसर पर झारखण्ड के सभी जिलों में 04 लेवर कोड का प्रति कर्मचारी महासंघ के द्वारा जलाया गया ,वहीं संविधान को भारत की आत्मा बताते हुए सभी ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं के द्वारा प्रस्तावना का पाठ करते हुए उसे बचाने का संकल्प लिया गया।
ज्ञातव्य हो कि अमेरिका के शिकागो शहर में 1886 में मजदूरों की कुर्बानी के बदौलत, 8 घंटा काम, 8 घंटा आराम और 8 घंटा मनोरंजन के मिले अधिकार को भारत सरकार पूंजीपतियों के हित में छीन कर 12 घंटा का कम लेने का फरमान जारी कर दिया है,उससे पूंजीपतियों की आमदनी में इजाफा तथा मजदूरों के सेहत में गिरावट आयेगी ,जिसका असर कालान्तर में सरकारी तथा प्रायवेट कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।कर्मचारीगण फिर से प्रेमचन्द के समझू साहू के बैल के समान जीवन जीने के लिए बाध्य हो जायेंगे,क्योंकि 1888के मजदूरों का संघर्ष से समूचे दुनिया भर के मेहनतकशों को लाभ मिल सकता है तो भविष्य में उसकी गलत नीतियों का प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है।सरकार का कहना है कि महिलाओं को रात में भी ड्युटी करना पड़ेगा।तब यह भी सोचना आवश्यक है कि जब दिन में ही महिलाकर्मी सुरक्षित नहीं है तो रात ड्युटी में वह कैसे सुरक्षित रहेगी ? सरकार का महिला सशक्तिकरण का नारा तो टांप-टांय फिस हो चुका है,क्योंकि अनेक ब्लात्कारी एम पी, एम एल ए सरकारी/गैर सरकारी पार्टी के ऊंचे ओहदे पर तैनात हो स्वच्छंद हो दिन-रात घूम रहे हैं।।सरकार कहती है कि महिला कर्मियों को पुरूष कर्मियों के बराबर वेतन दिया जायगा तो वर्ष 2014 से आज तक पूंजीपतियों की चाकरी में विपक्ष की महिलाओं के साथ-साथ सरकार के साथकदम से कदम मिलाकर चलने वाली महिलाओं का भी शोषण-दोहन करवा रहीं थी।इतना ही नहीं किसी भी संस्थान में100 से कम मजदूर/कर्मी को सुरक्षा, स्वास्थ्य, बाल बच्चों को शिक्षा से वंचित रखने का कोड क्यों जारी करना चाहती है?क्या 100 से कम वाले संस्थान के मजदूर आदमी की श्रेणी से बाहर अर्थात जानवर की श्रेणी की गिनती में आयेंगे ? इससे तो स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार देश में फिर से सामंती व्यवस्था लागू करना चाहती है।इसलिए ऐक्टू ने चारो लेवर कोड को गुलामी का दस्तावेज कहा है तो सीटू ने इसे अंग्रेजों के कदम पर चलने का मुखापेक्षी कहते हुए इसके खिलाफ अंतिम क्षण तक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है। भाकपा माले ने ट्रेड यूनियनों के संघर्ष का समर्थन किया है तथा मजदूरों को इसके खिलाफ सतत संघर्षशील रहने की अपील करते हुए संविधान की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध रहने को कहा है।

झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता संयुक्त सचिव सुधीर उराँव ने चार लेवर कोड की प्रति को जलाया तथा चरो लेवर कोड को वापस लेने की मांग की।एक-एक कर सभी सहभागियों ने बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर के मूर्ति पर माल्यार्पण किया तथा संयुक्त रूप से भारत के संविधान का सामूहिक रूप से पाठ कर संकल्प लिया।
अध्यक्षता महेश कुमार सिंह एवं संबोधन तथा कार्यक्रम कों सफल बनाने में गोपाल महतो, बच्चूनारायन सिंह,राजकुमार उराँव, किसुन दास,मो0 जफर आलम, मो0कैश मो0 मोख्तार हुसैन, विशु उराँव, रमेश उरांव ,भोला उराँव, शनि उराँव, बबलू॓ उराँव,जैतून बाखला, अनिता गंदूर,मंजू उराँव, मुनी उराँव, रंथी उराँव, दुलार उराँव आदि ने किया।
